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जीएसटी (GST) से रोजगार के नए अवसर खुले 

Feed by Manisha Cat- Education

जीएसटी लागू होने के साथ इस महीने की शुरुआत हुई, साथ ही वर्षों से देश में एक सामान कर व्यवस्था लागू करने का सपना पूरा हो गया. पूरे देश में एक सामान कर-प्रणाली होने से किसे फ़ायदा होगा और किसे नुक्सान, लोग इसे बारीकी से समझने में लगे हुए हैं. विभिन्न क्षेत्रों की छोटी-बड़ी कम्पनीयों को भी नए टैक्स सिस्टम के अनुसार खुद को तैयार करना पद रहा है. इसके लिए लोग जीएसटी के अलग अलग टैक्स सलेब्स को समझने, रिटर्न फाइल करने के तरीके और नई व्यवस्था के अनुसार अपने बिजनेस को ढालने की कवायद में जुटे हैं. ऐसे में कुशल पेशेवरों की जरुरत महसूस की जा रही है, जो इस व्यवस्था को समझने और व्यवस्थित तरीके से लागू करने में सक्षम हों, यदि आप जीएसटी की समझ रखते हैं या जीएसटी परफोफेशनल बन कर सफल कैरियर की बुनियाद रखना चाहते हैं, तो आप भी तैयारी में अभी से जुट जाएँ. 

New jobs open from GST

New jobs open from GST

टैक्सेशन में आ रही हैं नौकरियां 

जीएसटी लागू होने से सभी कंपनियों को नए टैक्स सिस्टम के अनुसार अपने प्रोडक्ट के लिए निर्धारित स्लैब को समझना पडेगा, जिसके लिए उन्हें टैक्स एडवाइजर, टैक्स मैनेजर और टैक्स अकाउंटेंट जैसे फ्रोफेशनल की आवश्यकता पड़ेगी. ऐसे में टैक्स के विषय में रूचि रखनेवाले युवाओं के लिए टैक्सेशन एक बेहतर कैरियर विकल्प साबित हो सकता है. टैक्सेशन में नौकरी पाने के कई रास्ते हैं. आप अपने कम्प्युटर के जरिये अच्छा रोगजार तलाश कर सकते हैं. ऐसी कई वेबसाइट है, जिनमें आप टैक्सेशन से सम्बंधित कैरियर के रास्ते खोज सकते हैं. इसके साथ ही आप टैक्स कंसल्टेंट के रूप में भी काम कर सकते हैं. टैक्स कंसलटेंट को विभिन्न फार्मों की जानकारी होती है और यह लोगों को टैक्स से सम्बंधित जानकारी प्रदान करता है. किसी भी टैक्स कंसल्टेंट का मुख्य उद्देश्य कम्पनी के लिए अपने तकनीकी ज्ञान का पूरा प्रयोग कर उसे फ़ायदा पहुंचाना होता है . 

प्रवेश के लिए आवश्यक योग्यता 

भारत में विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों द्वारा टैक्सेशन से संबधित कोर्स कराये जाते हैं. इनमें डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी है. अंदर ग्रेजुएट स्टार के कोर्स करने के लिए छात्र का किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड से बारहवीं पास होना आवश्यक होता है. वहीं पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए छात्र का सम्बंधित विषय में ग्रेजुएट होना अजरुरी होता है. 

इन कोर्सेस में मिलेगा प्रवेश 

टैक्सेशन में छात्र डिप्लोमा इन टैक्सेशन, बीकॉम इन टैक्सेशन सर्टिफिकेट कोर्स इन टैक्सेशन, कॉरेस्पोंडेंस कोर्स इन फाइनेंशियल टैक्सेशन, एडवांस्ड डिप्लोमा इन फाइनेंशियल अकाउंटिंग एन्ड टैक्सेशन, डिप्लोमा इन इनकम टैक्स एन्ड कंपनी लॉ, एमकॉम इन फाइनेंस एन्ड टैक्सेशन, एमबीए इन टैक्सेशन मैनेजमेंट, स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम इन टैक्स एन्ड रेगुलेटरी मैनेजमेंट, बैचलर डिग्री इन अकाउंटिंग एन्ड टैक्सेशन और मास्टर ऑफ़ साइंस इन टैक्सेशन कोर्स कर सकते है. 

संस्थान : 

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ फाइनेंशियल मैनेजमेंट, नई दिल्ली.
  • एराईज बिजनेस स्कूल, नई दिल्ली.  
  • इंडियन मैनेजमेंट ट्रेनिंग एन्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट, जालंधर. 
  • गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर.
  • नागपुर कॉलेज ऑफ़ टैक्सेशन, नागपुर.

अकाउंट्स की जानकारी रखनेवाले युवाओं की बढ़ेगी मांग 

कंपनियों को एक स्टार के बाद अपने काम का हिसाब रखने के लिए अकाउंटेंट की जरुरत पड़ती है. जीएसटी के कारण भारतीय अर्थव्वयवस्था में हुए परिवर्तन के चलते इस क्षेत्र में फाइनेंस और अकाउंट्स से जुड़े लोगों की मांग और बढ़ जाएगी, क्योंकि कंपनियों को मणी मैनेजमेंट, ऑडिट अकाउंट एनालिसिस, टैक्सेशन, रिटेनरशिप व् फाइनेंशियल एडवाइज के लिए इन फ्रोफेशनल्स की आवश्यकता पड़ेगी.  ऐसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट की मांग बढ़ने के साथ साथ कॉमर्स स्नातकों के लिए नौकरी के कई मौके आएंगे, क्योंकि अकाउंटिंग और फाइनेंस से जुडी जॉब्स के लिए बीकॉम को एंट्री लेवल डिग्री माना जाता है. अब तक बीकॉम की डिग्री रखनेवाले 5 से 10 प्रतिशत छात्रों को ही अच्छी नौकरी मिल पाती थी. बाकियों को सीए और एमबीए जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्स करने की जरुरत पड़ती थी. लेकिन जीएसटी कॉमर्स ग्रेजुएट्स के लिए एक वरदान बन कर आया है. प्रोडक्ट के अनुसार अलग अलग टैक्स स्लैब और जेएसटीएन सॉफ्टवेयर को समझने व् उसके क्रियान्वयन एवं समय पर रिटर्न फाइल करने जैसे कामों के लिए छोटी कंपनियां एवं बिजनेस ऑनर्स बीकॉम ग्रेजुएट्स को हायर कर रहे हैं. 

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