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फिल्म मेकिंग से चुनौती और मजेदार वाला करियर बनाएं 

Feed by Manisha Cat- Education

आपकी सफलता 100 फीसदी प्रयास और मेहनत पे निर्भर है अगर ऐसा है तो सफलता आपकी कदम चुनेगी और फिर आप न सिर्फ अपना भाग्य बदलते है, बल्कि दूसरों का भी भाग्य बदलते हैं. यही स्थिति फिल्म निर्माण की है. यदि हम अपनी पढ़ाई के साथ साथ हर काम में यही स्तर बनाएं रखें, तो सफलता मिलना निश्चित है. 

Make a challenging and fun career with film making.

Make a challenging and fun career with film making.

एक समय था, जब फिल्म देखना मात्र मनोरंजन था और छोटे छोटे शहरों में फिल्म देखनेवालों को अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता था. फिर बड़े परदे पर चमकने से लेकर उसके निर्माण में आम परिवार से आनेवालों के लिए कैरीयर बनाना दूर की बात थी. वक्त बदला और फिल्म निर्माण भी कैरियर की असीम सम्भावनाओं को साथ लेकर आया है, तमाम लोग मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों से हर रोज अवगत होते है, चाहे अखबार हो, टीवी हो या फिल्म, लेकिन शायद ही एक मिनट के लिए सोचते होंगे, की इसका निर्माण कैसे होता है, यदि फिल्म 'थ्री इडियट्स' आज आइएआइटी के करिकुलम में शामिल हुआ है, तो इस फिल्म के सन्देश को समझना आवश्यक है. बाले ही घर परिवार के सपनों के आकाश में अपने सपने को कहीं दवा कर रख दिया हो, लेकिन वह सपना भी आपको कैरीयर की बुलंदियों पर पहुंचा सकता है. 'कामयाब बनो, कामयाबी के पीछे मत भागो'. यह पंक्ति काफी कुछ कहती है और यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में भी लागू होती है. 

फिल्म निर्माण नहीं है आसान 

हर कोइ जीवन में इंजिनियर या डॉक्टर नहीं बनता, लेकिन अपने जीवन में ऐसा कुछ कर जाता है, जिससे दुनिया का हर व्यक्ति प्रभावित होता है. एक कहावत है 'पढोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे होंगे खराब'. लेकिन अब वक्त बदल गया है दुनिया के हर क्षेत्र में अब कैरीयर की तमाम संभावनाए है. सौ फीसदी प्रयास और मेहनत करने पर सफलता आपके कदम चूमती है और फिर आप न सिर्फ अपना भाग्य बदलते है, बल्कि दूसरों का भी भाग्य बदलते है, यही स्थिति फिल्म निर्माण की है, फिल्म बनाना सिर्फ एक या दो व्यक्ति के वश की बात नहीं है, बल्कि सौ से भी अधिक लोगों की यूनिट एक साथ कई महीनों तक काम करती है, तब जाकर फिल्म का निर्माण होता है. 

थ्योरी से लेकर निर्माण तक की पढ़ाई 

भारत ही नहीं विश्व की तमाम संस्थाओं में जहां फिल्म मेकिंग की पढ़ाई होती है, वहीं फिल्म के सिद्धांत पर आधारित पाढ़यक्रम भी है. कहें टेक्नीकल पढ़ाई पर अधिक जोर रहता है, तो कहीं फिल्म की थ्योरी को लेकर. जामिया मिलिया इसलामिया, नई दिल्ली स्थिक एजेके एमसी आरसी के छात्रों की पहचान सिनेमेटोग्राफी में काफी है, तो फिल्म एन्ड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, पुणे के फिल्म स्क्रिप्ट से लेकर एक्टिंग तक के कोर्स उबलब्ध है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में एमसीआरसी में भी एक्टिंग का कोर्स शुरू किया गया है. वहीं कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म इंस्टीट्यूट की भी एक अलग पहचान है और कैमरा हैंडलिंग से लेकर फिल्म निर्माण की तमाम बारीक विषयों से छात्रों को प्रशिक्षित किया जाता है. इसके अलावा, देश में तमाम निजी संस्थान है, जहां फिल्म से जुड़े तमाम विषयों की अलग अलग पढ़ाई होती है. 

अपार सम्भावनाओं का क्षेत्र 

आज तो टीवी मीडिया में कार्यरत पत्रकार भी फिल्म निर्माण में आने लगे हैं. इस खेत्र में कहानी लेखन से लेकर स्क्रिप्ट लेखन, गीत, संगीत, एक्टिंग, सिनेमेटोग्राफी, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग, कोरियोग्राफी से लेकर एडिटिंग और मार्केटिंग जैसे कार्य है, जिसमें कैरियर की संभावनाएं है और तमाम संस्थाओं में संबधित पाठ्यक्रम संचालित किये जाते है चूंकि, यह क्षेत्र क्रिएटिविटी का है, तो ऐसा नहीं की सिर्फ कोर्स करने से ही छात्र पारंगत हो जाते है, बल्कि पारंगत होने के लिए सतत प्रयास की जरुरत होती है. यानी जितनी आपकी प्रैक्टिस होगी, जितना आपके जीवन का अनुभव होगा, उतनी ही सफलता आपके कदम चूमेगी. इस फील्ड में कई ऐसे लोग है, जिन्होंने फिल्म निर्माण में कोइ ट्रेनिंग नहीं ली है, लेकिन धैर्य, सतत प्रयास और कड़ी मेहनत से न केवल अपना मुकाम हासिल किया है. बल्कि अपनी ख़ास पहचान भी बनायी है.   

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The courses are meant for those, who have already obtained good knowledge of camera basics & lighting, have good hands on approach to use the camera & wants to specialize in particular field. These courses are specially designed for those who plan their career as professional photographers.

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