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इन 5 ऑफबीट इंजीनियरिंग ब्रांच से बनाएं अपना कैरियर

Feed by Manisha Cat- Education

हमारे देश में कैरियर के लिए इंजीनियरिंग की रह चुनने का विकल्प हमेशा से शीर्ष पर रहा है. इधर कुछ वर्षो में इंजीनियरिंग में प्रचलित ब्रांच से इतर कई नए ब्रांच शामिल हुए है. इन ब्रांच से डिग्री हासिल करनेवालों की मौजूदा जॉब मार्केट में बहुत मांग है. इसलिए प्रवेश के दौरान इन ब्रांच को पाने की होड़ होती है. नई संभावनाओं से पूर्ण एक बेहतरीन भविष्य का आधार तैयार करनेवाले इन इंजीनियरिंग ब्रांच में से पांच प्रमुख ब्रांच के बारे में जानिए इस आर्टिकल में: -

Build your career with these 5 offbeat engineering branches.

Build your career with these 5 offbeat engineering branches

'आप बड़े होकर क्या बनेंगे?' एक समय था जब इस सवाल पर अमूमन छात्रों का जवाब होता था इंजीनियर व डॉक्टर. इसके बाद बहुत से नए प्रोफेशनल कोर्सेज का दौर आया. नए कैरियर विकल्पों की और लगो मुड़े. लेकिन इंजीनियरिंग एवं डॉक्टरों के पेशे का चयन करनेवाले कम नहीं हुए. इंजीनियर बनाने की राह चुननेवाले छात्रों की संख्या वक्त के साथ बड़ी ही. इंजीनियरिंग के नए कॉलेजों का खुलने का सिलसिला अब भी जारी है. साथ ही पिछले एक दशक में इंजीनियरिंग के विषयों में भी इजाफा हुआ. कई नए ब्रांच शुरू हुए और इन नए ब्रांच के डिग्रीधारकों की मांग भी तेजी से बड़ी. ऐसे ही कुछ ब्रांच है. : पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, बायो मेडिकल इंजीनियरिंग, मेक्ट्रोनिक्स इंजनियरिंग, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन एन्ड रोबोटिक्स इंजीनियरिंग.

1. पेट्रोलियम इंजीनियरिंग Petroleum Engineering

एक कैरियर विकल्प के तौर पर पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में ऑयल एन्ड गैस फील्ड के मूल्यांका, विकास और उत्पादन (इवेल्युएशन, डेवलपमेंट और प्रोडक्शन) के सभी चरण शामिल होते है. एक पेट्रोलियम इंजीनियर का लक्ष्य खनन क्षेत्र से हाइड्रोकार्बन की रिकवरी को अधिकतम स्तर पर लाना और पर्यावरण को होनेवाले नुक्सान को कम से कम रखना होता है. पिछले कुछ वर्षों में भारत में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग एक बेहतरीन कैरियर विकल्प बन कर उभरा है. इसलिए आज देश के प्रमुख संस्थानों में इस ब्रांच में कोर्स संचालित हो रहे हैं. आप अगर इस विषय में रूचि रखते हैं, तो आकर्षक वेतन एवं मोकोवाले एक बेहतरीन कैरीयर की और कदम बढ़ा सकते है. पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करनेवालों के लिए तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, ऑयल इण्डिया लिमिटेड, गैस ऑथरिटी ऑफ़ इण्डिया, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कोरपोरेशन समेत देश की कई प्राइवेट कंपनियों में भी जॉब के बेहतरीन मौके होते हैं.

प्रमुख यूजी, पीजी कोर्स है : अपस्ट्रीम, गैस, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल में स्पेशलाइजेशन के साथ अप्लाइड पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में बीटेक कर सकते है. इसके अलावा जियो साइंस इंजीनियरिंग, जियो इंफॉर्मेटिक्स इंजीनियरिंग, माइनिंग इंजीनियरिंग में बीटेक किया जा सकता है. पीजी कोर्स में पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन, एनर्जी सिस्टम, पाइप लाइन इंजीनियरिंग, प्रोसेस डिजाइन इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन के साथ केमिकल इंजीनियरिंग में एमटेक करने का विकल्प होता है. 

यहां से कर सकते है कोर्स: 

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मुंबई.   
  • इंडियन स्कूल्स ऑफ़ माइंस, धनबाद. 
  • यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेट्रोलियम एन्ड एनर्जी स्टडीज, देहरादून.
  • राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ़ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, यूपी. 


2 . मेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग Mechatronics Engineering

मेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग की वह शाखा है, जिसमें विभिन्न इंजीनियरिंग डिसीप्लीन, जैसे मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, टेली कम्युनिकेशन, कंट्रोल एन्ड कम्प्यूटिंग इंजीनियरिंग को मिला कर पढ़ाई होती है. मेक्ट्रोनिक्स का लक्ष्य इन सारे इंजीनियरिंग डिसिप्लीन का एकीकरण करनेवाले डिजाइन प्रोसेस का निर्माण करना है. मेक्ट्रोनिक्स इंडस्ट्री में डिजाइन और उपकरण डेवलप करनेवाले इंजीनियर और इनका रख-रखाव करनेवाले टेक्नीशियन, दोनों को रोजगार मिलता है. पिछले कुछ वर्षों में मेक्ट्रोनिक्स प्रोफेशनल्स की मांग बहुत बड़ी है. मेक्ट्रोनिक्स में चार वर्षीय बैचलर डिग्री कोर्स कर सकते है. इस ब्रांच में मास्टर डिग्री कोर्स भी उपलब्ध है. इसके अलावा मेक्ट्रोनिक्स में दो वर्षीय एसोसिएट डिग्री लेने का भी विकल्प है. हमारे यहां अभी यह ब्रांच नया है इसलिए इसके कोर्स करानेवाले संस्थान भी सीमित है. कुछ संसथान है- कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, अन्ना यूनिवर्सिटी. दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ़ टूल इंजीनियरिंग. डपार्टमेन्ट ऑफ़ मेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग, डिपार्टमेंट ऑफ़ मेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग, एसआरएम यूनिवर्सिटी. 

3. ऑटोमेशन एन्ड रोबोटिक्स Automation and Robotics

आप अगर किसी रोबोट को बनाने का सपना देखते है या 'आयरन मैन' की कल्पना आपको चकित करती है, तो इसका अर्थ है की आपका रुझान ऑटोमेशन एन्ड रोबोटिक्स के कोर्स की तरफ है. ऑटोमेशन एन्ड रोबोटिक्स इंजीनियरिंग की एक स्पेशलाइज्ड ब्रांच है, जो इलेक्ट्रो -मेकेनिक्स, रोबोटिक सेंसर्स, ऑटोमेटिक सिस्टम और आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस का विस्तार में ज्ञान देता है. इस क्रॉस में रोबोटों को डिजाइन करना, उन्हें मेंटेन करना, नए एप्लिकेशन डेवेलप करना और ऑटोमेशन सिस्टम के क्षेत्र में रिसर्च करना शामिल है. खुद से चलनेवाली कारों के विचार से ऑटोमेशन एन्ड रोबोटिक्स के कोर्स का जन्म हुआ है. कम लागत पर गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं की बढ़ती मांग के चलते ऑटोमेशन एन्ड रोबोटिक्स एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप से उभरा है. 

ऐसे बढ़ें आगे : रोबोटिक्स असल में मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कम्प्युटर साइंस का एक हिस्सा होता है. इन इंजीनियरिंग के ब्रांच में रोबोट के डिजाइन, कंस्ट्रक्शन, पावर सप्लाई, इन्फर्मेशन प्रोसेसिंग और सॉफ्टवेयर पर काम होता है. अधिकतर संस्थान अन्य ब्रांच की इंजीनियरिंग डिग्री के साथ रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन कराते है. हालांकि, अब कुछ चुनिंदा संस्थान एक ब्रांच के रूप में रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री कोर्स कराने लगे है. 

सम्भवनाए हैं यहाँ : इस विषय के पेशवरों की ऑटोमोबाइल्स और इंडस्ट्रियल टूल्स में मांग होती है. नासा में जॉब पाने का मौक़ा होता है. रोबटों टेक्नोलॉजी, कम्प्युटर कंट्रोल्ड मशीन प्रोग्रामिंग, रोबोटिक सेल्स में भी नौकरी के अवसर होते है. 

4. बायोमेडिकल इंजीनियरिंग Biomedical Engineering

यह कोर्स उन छात्रों के लिए है, जो मेडिसिन और इंजीनियरिंग दोनों में ही दिलचस्पी रखते है. इस प्रोग्राम में परपरागत इंजीनियरिंग तकनीकों को बायोलॉजिकल साइंस के साथ मिलाया जाता है, जिसका मकसद मानव स्वास्थ्य को बेहत बनाना और जीवन की जटिलताओं को बेहतर तरीके से समझना होता है. इसके जरिये जांच और चिकित्सा को और बेहतर बनाने की कोशिश की जाती है.

यहां मिलेगी जॉब 

एक बायोमेडिका इंजीनियर होसटिटल, मेडिकल उपकरणों की मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों, फार्मास्यूटिकल्स, बायोमेडिकल रिसर्च के संस्थानों, अकादमिक क्षेत्र, मेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन, मेडिकल प्रोडक्ट डेवेलपमेंट और मैनेजमेंट एवं हॉस्पिटल सिस्टम में टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एवं हॉस्पिटल सिस्टम में टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट के क्षेत्र में जॉब हासिल कर सकता है. इस क्षेत्र के कुछ प्रमुख नियोक्ता है- लार्सन एन्ड टुब्रो, बीपीएसल हेल्थकेयर, विप्रो जीई मेडिकल सिस्टम, सीमेंस, सिप्ला, इलोक्ट्रोकेयर सिस्टम्स एन्ड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पिके मॉर्गन (इण्डिया) प्राइवेट लिमिटेड, मेडट्रॉनिक्स-मेडिको हेल्थ केयर सिस्टम, ट्रांस एशिया बायोमेडिकल लिमिटेड आदि.

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के विषय 

डिजिटल इंजीनियरिंग, मेडिकल फिजिक्स, माइक्रोप्रोसेसर्स, बायोइलेक्ट्रिक फेनोमेना, पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोइंस्ट्रूमेंटेशन, हॉस्पिटल इंजीनियरिंग, बायोसिग्नल प्रोसेसिंग आदि बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के विषय है. बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल करनेवाले या तो इंडस्ट्री में नौकरी कर सकते है या आगे उच्च शिखा में जा सकते है. छात्रों के सामने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में एमई या एमटेक करने का विकल्प खुला है. 


5. एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग Agricultural Engineering

खेती की तकनीक एवं उपकरणों के विकास पर लगातार काम हो रहा है और इसमें एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है. वैसे तो एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग बहुत पहले से कोर्स के तौर पर मौजूद है, लेकिन हाल के वर्षों में से डिग्री हासिल करनेवालों के लिए मौके बढे है. एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में कृषि के क्षेत्र में काम आनेवाले उपकरणों के विकास और निर्माण के साथ खेती में उपयोग में लाये जानेवाले बीज और खाद की उन्नत किस्मों पर काम होता है. एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग करने के ग्रेजुएशन एवं पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों कोर्स है. एग्रीकल्चर में बीटेक के बाद एमटेक या एमएससी कर के अच्छा कैरियर बना सकते है. 

मौके यहां है : एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद कृषि उपकरणों को डिजाइन करने, फसल उत्पाद तैयार करनेवाली कंपनियों, मिट्टी और पानी के संरक्षण के क्षेत्र में काम करनेवाले संस्थान में कैरियर बना सकते है. सकरकारी विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों, एग्रीबिजनेस फार्म, रिसर्च ऑर्गनाइजेशन एवं लेबोरेटरी, बैंक और वित्तीय निगम आदि में रिसर्च, मैनेजमेंट, सेल्स एवं मार्केटिंग की जॉब के मौके होते है. डिग्री हासिल करने के बाद एग्रीकल्चर इंजीनियर, एग्रीकल्चर क्रॉप इंजीनियर, एग्रीकल्चर स्पेशलिस्ट, सॉइल साइंटिस्ट, सर्वे रिसर्च एग्रीकल्चर साइंटिस्ट आदि के तौर पर आगे बढ़ सकते है.  

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