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फ्लोरीकल्चर में बनाएं कैरियर 

Feed by Manisha Cat- Education

शायद ही ऐसा कोइ होगा, जिसे फूल पसंद न हों. लगभग सभी को फूलों से प्यार होता है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है की फूलों के प्रति प्यार को कैरियर का रूप दिया जा सकता है. जी हां, फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की खेती के क्षेत्र में आप अपना भविष्य संवार सकते है. जाने कैसे.....  

आज फूलों की खेती या बागवानी महज शौक भर के लिए किया जानेवाला काम नहीं रह गया है. यह एक कैरियर क्षेत्र बन चुका है, जो फ्लोरीकल्चर के तौर जाना जाता है. ऐसे लोग, जिन्हें फूलों, पौधों, एवं प्रकृति से प्यार है, उनके लिए यह सबसे अच्छा कैरियर विकल्प है. फ्लोरीकल्चर उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें बेहतरीन कैरियर संभावनाएं भी जन्म ले रही है. 

Today, flowering cultivation or horticulture is not enough to be done just for a hobby. It has become a career area, which is known as floriculture. For those people who love flowers, plants, and nature, this is the best career option for them. The floricultural industry is growing rapidly and it also has excellent career prospects.

Make a career in floriculture.

Make a career in floriculture

क्या है फ्लोरीकल्चर 

फ्लोरीकल्चर का सीधा अर्थ फूलों की खेती है. लेकिन, इसे एक कार्य क्षेत्र या विषय के तौर पर देखे, तो फ्लोरीकल्चर कला, विज्ञान एवं तकनीक का सम्मिश्रण है, जलकृषि, नए परिदृश्य का निर्माण, फूलों की सजावट, उत्पादन एवं प्रबंध, माइक्रो प्रॉपगेशन के साथ ही फूलों एवं पौधों से ऑयल निकालने का काम, फूलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए रिसर्च एवं मार्केटिंग इस कार्य क्षेत्र का हिस्सा है. इसमें बीज एवं डंठल से अच्छी कवालिटी के फूलों की खेती, बेमौसम फूलों का उत्मापडा, फूलों के झड़ने बचाने के तरीके, फूलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के उपाय, बड़े आकार के फूल व् अधिक से अधिक संख्या में फूलों के उत्पादन की तकनीक, फूलों की कटिंग, एक्सपोर्ट के दौरान रख रखाव आदि शामिल है. 

कब कर सकते हैं शुरुआत 

आप अगर इस क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, तो 10वीं के बाद सर्टिफिकेट कोर्स एवं डिप्लोमा कोर्स कर सकते है. बॉटनी से 10 +2 करनेवाले अभ्यर्थियों के लिए फ्लोरीकल्चर में बैचलर डिग्री में प्रवेश का रास्ता बनाता है. कुछ कॉलेज बैचलर कोर्स में एडमिशन प्रवेश परिक्षा के माद्यम से, तो कुछ स्कोर के आधार पर प्रवेश देते है. बेचलर डिग्री हासिल करने के बाद इस विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स भी उपलब्ध है. 

जाने कोन कौन से कोर्स हैं 

सर्टिफिकेट इन फ्लोरीकल्चर टेक्नोलॉजी. सर्टिफिकेट इन गार्डनिंग. डिप्लोमा इन कमर्शियल फ्लोरीकल्चर. डिप्लोमा इन फ्लोरीकल्चर एन्ड लैंडस्कैप गार्डनिंग. पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फ्लोरीकल्चर. बीएससी (फ्लोरीकल्चर एन्ड लैंडस्केपिंग). एमएससी (फ्लोरीकल्चर एन्ड लैंडस्केपिंग), पीएचडी.

कुछ प्रमुख संस्थान ये है

नार्थ इंस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी -सेंटर फॉर डिस्टेंस एजुकेश, शिलांग (मेघालय). यूनिवर्सिटी ऑफ़ हार्टिकल्चर साइंस, बागलकोट (कर्नाटक). 

डॉ यशवंत सिंह परमार औद्दानिकी एवं वानिकी विश्वविद्द्यालय फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग, सोलन (हिमाचल प्रदेश). सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रोद्द्योगिकी एवं विज्ञान संस्था, इलाहाबद (उत्तर प्रदेश). पंजाब कृषि विश्वविद्यालय -कृषि कॉलेज, लुधियाना (पंजाब). बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय, मोहनपुर (पश्चिम बंगाल).

यहां है कैरियर के मौके 

फ़्लोरीकल्चरिस्ट का कार्य क्षेत्र मूल रूप से नर्सरी, बोटेनिकल गार्डन, जेनेटिक कम्पनिया, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट कंपनियां, फ़ार्म कम्पनिया है. कुछ और क्षेत्र है, जैसे सौंदर्य प्रसाधन और इत्र विनिर्माण कम्पनीयां, जो अपने फ्रॉडक्शन एवं कच्चे माल के उत्पादन को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहतर बनाना चाहती है, फ़्लोरीकल्चरिस्ट के लिए उनमे बेहतरीन जॉब के मौके उपलब्ध होते है. इसके साथ ही अधिकतर क्लब, रिजॉर्ट, टाउनशिप, मोल, इंडस्ट्रियल एरिया, पार्क, पब्लिक गार्डन, ऐतिहासिक इमारतें एवं बाग़ आदि में बागवानी के विशेषज्ञों और डिजाइनरों की जरुरत होती है. ग्रीन हाउस या पॉली -हाउस में मैनेज़र या साइंटिफिक ऑफिसर के तौर पर जॉब कर सकते है. इस्टेट मैनेजर या प्लांटेशन एक्सपर्ट के रूप में काम करने के विकल्प है.  

सरकारी निकायों, जैसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर), रक्षा जैव -ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (डीआईबीइआर), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), सीएसआईआर-राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), कृषि एवं प्रस्कृट खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीएडीए) में फ़्लोरीकल्चरिस्ट की नियुक्ति की जाती है. फ्लोरीकल्चर में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद नेट परिक्षा पास कर या पीएचडी कर के एग्रीकल्चर कॉलेज में लेक्चरर या ैस्टेन्ट फ्रोफेसर के तौर पर नौकरी शुरू कर सकते है.   

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