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डेवलपमेंट स्टडीज कर कैरियर को दें नयी जगह 

Feed by Manisha Cat- Education

यदि आप समाज से जुड़ें रहना चाहते हैं और उनके लिए कुछ करना चाहते हैं, उनके विकास के मुद्दों, महिला सशक्तीकरण, मानवाधिकार, विस्थापन जैसे मामले आपको लुभाते है, तो निश्च्ति ही आपकी दिलचस्पी विकासशील अध्यन यानी डेवलपमेंट स्टडीज में है. आज के दौर में इसकी व्यापकता बड़ी है और बदलते परिवेह में वैश्विक स्टार पर इस क्षेत्र में काफी अध्ययन हो रहा है और यह क्षेत्र कैरियर के विकल्प के तौर में उभर रहा है. 

If you want to stay connected to society and want to do something for them, such issues as their development issues, women's empowerment, human rights, displacement, then you are certainly interested in developing studies i.e. development studies. In today's era, its prevalence is large and in the changing scenario, there is a lot of study in this field on the global star and this field is emerging as a career option.

Development studies

क्या आपने कभी सोचा है की सरकार कोइ योजना कैसे लाती है, सरकार कोइ नीति किस तरह बनाती है या फिर देश के विकास के लिए जो योजनाएं लागू की गयी है, उनकी क्या खामियां है, जो समाज को प्रभावित करते है और भारत जैसे विकासशील देशों के लिए महत्त्व रखते है. कहीं बाढ़, कहीं सूखा से कितने लोग प्रभावित हुए, हमारी स्नाख्या पर क्या प्रभाव पड़ा, जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ा, जैसे मुद्दों का अध्ययन कौन करता है और उसकी अध्ययन कौन करता है और उसकी जरुरत क्या है? ऐसे में सवाल यह उठता है की दुनिया भर के देशों में ऐसी कौन सी नीतियां बनी, जिससे उस देश को, वहां के लोगों को फायदा पहुंचा या फिर उसके उलट नुक्सान पहुंचा. मालूम हो की इन विषयों का अध्ययन सरकार से जुड़े तंत्र तो करते ही है, तमाम उच्च संस्थानों के छात्रों और शोधकर्ताओं की नजर भी इस और लगी रहती है और ये तमाम अध्ययन डेवलपमेंट स्टडीज के दायरे होते है. इसका अध्ययन व्यापक तौर पर तीसरी दुनिया और ब्रिटेन के अधीन रहे देशों के विकास से जुड़े शोधों पर आधारित है. 

क्या है डेवलपमेंट स्टडीज 

विकासशील अध्ययन नब्बे के दशक में एक नए उभरते हुए क्षेत्र के तौर पर सामने आया और इसके बाद से यह लगातार लोकप्रिय होता गया. यही कारण है की भारत जैसे विकासशील देश के तमाम शीर्ष विश्वविद्यालयों और संस्थानों में इसका उच्च अध्ययन किया जाने लगा. इससे जुड़े विभिन्न कोर्स भी संचालित किये जाने लगे. जहां पहले सिर्फ एमफिल या पीएचडी जैसे कोर्स कुछ संस्थानों में उपलब्ध थे, वहीं अब इस विषय में मास्टर कोर्स संचालित किये जाते है. अब अंदर ग्रेजुएट कोर्स भी उपलब्ध है. इसके तहत विकास के मुद्दों, इसके प्रभावों से लेकर तमाम बारीक मुद्दों का अध्ययन किया जाता है. यह समाज विज्ञान की एक मल्टीडिसिप्लिनरी शाखा है और करीब तीन दर्जन से अधिक विषयों मसलन, सामुदायिक विका, विकास संचार, विकास सिद्धांत, डायस्पोरा स्टडीज, इकोलॉजी, आर्थिक विकास, इंजीनियरिंग, जेंडर स्टडीज, मानवाधिकार, विस्थापन अध्ययन, पीस एन्ड कन्फ्लिक्ट स्टडीज, अंतर्राष्ट्रीय विकास, जनसंख्या अध्ययन, जान स्वास्थ्य, सामाजिक विकास, समाज कार्य, महिला अध्ययन जैसे विषयों के पढ़ाई की जाती है. 

कहाँ से करें कोर्स 

देश के तमाम संस्थानों और विश्वविद्यालयों में इस विषय से जुड़े कोर्स संचालित किये जा रहे है. सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखण्ड, रांची में भी इससे जुड़े विषयों मसलन, ह्यूमन राइट्स एन्ड कन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट जैसे स्कूल स्थापित है. जहां से मास्टर कोर्स किया जा सकता है. वही, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस में इस कोर्स से जुड़े सेंटर की स्थापना 2012 में हुई. यहां डेवलपमेंट स्टडीज और वीमेंस स्टडीज में अलग अलग मास्टर कोर्स संचालित किये जाते है, वहीं दोनों विषयों में एमफिल और पीएचडी कोर्स के भी पढ़ाई होती है. यहां छह अलग अलग तरह एक सेंटर भी है. मसलन एडवांस्ड सेंटर फॉर वीमेंस स्टडीज सहित डेवलपिंग इकोनॉमिक्स डेवलपिंग सोसाइटीज, पॉपुलेशा, हेल्थ एन्ड डेवलपमेंट, पब्लिक पॉलिसी, हैबिटेट एन्ड ह्यूमन डेवलपमेंट और सोशल थ्योरी के सेंटर भी कार्यरत है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्थित सेंटर फॉर जवाहरलाल नेहरू टडीज में भी एमए, एमफिल और पीएचडी के कोर्स संचालित किये जाते है. वही, नयी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सेंटर फॉर इनफॉर्मल सेक्टर एन्ड लेबर स्टडीज स्थापित है, जहां मास्टर कोर्स संचालित किये जा रहे है. हालांकि, विदेशी संस्थाओं में डेवलपमेंट स्टडीज के तहत तमाम विषयों पर कोर्स संचालित किये जा रहे है, जो फिलहाल भारत के किसी संस्थान में उपलब्ध नहीं है.   

कहाँ मिलेगी नौकरी 

इस फील्ड में योग्य शोधकर्ताओं की कमी है और उनकी सबसे अधिक मांग है. इस फील्ड में दक्ष छात्र तमाम स्वयंसेवी संस्थानों के अलावा, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों मसलन संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, कंसल्टेंसी फार्म, कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (सीएसआर) से जुड़े केंद्रों में काम करते हैं और अच्छा वेतन पाते है. वहीं, तमाम शोध केंद्रों, विश्वविद्यालयों और उच्च अध्यन से जुड़े संस्थानों में पढ़ाने से लेकर शोध कराने वाले लोगों की जरुरत काफी है. साथ ही, यदि आपने विशेषज्ञता हासिल कर ली है तो आप फ्रीलांसिंग भी कर सकते है. 

कुछ प्रमुख संस्थाएं. 

  • सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड, रांची 
  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली 
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली 
  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस, मुम्बई 
  • सेंटर फॉर द डेवलमेंट सोसाइटीज (सीएसडीएस), दिल्ली 

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