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स्त्री के श्वेत प्रदर का ईलाज

औरतों की बीमारी, उनके कारण और उपचार का जिक्र करते है। जो महिला शर्म के कारण औषधि लेने डाक्टर या वैध के पास नही जाती और अन्दर ही अन्दर रोग का शिकार होती रहती है, उन्हे रोग छिपाना नही चाहिए। यह आदत खतरनाक होता है, बीमारी की अवस्था में तुरंत किसी योग्य डाक्टर से परामर्श लें नही तो घरेलु अचूक दवाय को अपनायें।

श्वेत प्रदर पहले साधारण होता है। आरम्भ में ही यदि इसका इलाज न कराया गया तो ये भयंकर उप धारण कर लेता है और उससे अनेक तरह की बीमारियां फैल जाती है। इसे ल्यूकोरिया भी कहते है।

यह रोग अधिक मैथुन या क्लेश या सीमा से अधिक कार्य करने से होता है, परंतु अंतिम दशा के रोगी कम पाए जाते है, क्लेश से दूसरी में मैथुन से अधिक संख्या में होता है।

लक्षण: स्त्री को पेशाब आना एक बीमारी है। मूत्र सफेद आना, बदन शिथिल रहना, मुंह और तलुवा सूखना, मुच्छां, जम्हाई आना, बदन शिथिल रहना, भोजन मे रुचि न आता, प्रलाप इत्यादि लक्षण हों तो समझे बीमारी बढ गई है।

औषधि : 1. पके हुए केले, आंवलो का रस, शहद और खांड इनको मिलाकर खाने से बीमारी दूर होती है। पके हुए केले 2-3 से अधिक न हों। आंवले का रस, शहद और खन्द जरुरत के अनुसार दें।

2. उडद का आटा, मुलहटी, बिए रीकद शहद खांड 6-6 माशे लेकर चूर्ण बनाओं और उसे 6-6 माशे प्रात: काल दूध के साथ दे। गाय का दूध अधिक हितकर होता है। पीडा से पेशाब उतरना है तो दो तोले लेकर इलायची के पत्तों की फंकी मारो।

3. आंवले पानी में घिसें और उनमें शहद और खांड आवश्यकतानुसार मिलाकर पानी से तीन दिन दोनों वक्त देने से रोग ठीक हो जाएगा।

4. जो औरत मट्ठा पीती हो उसे मट्ठे के साथ चावल भी खाने चाहिए और गागेकेशर पीसकर तीन दिन तक पीने से रोग नष्ट होगा।

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