Print Document or Download PDF

द्रोणपुष्पी से रोगों का उपचार

द्रोणपुष्पी का पौधा एक वर्षीय तथा सीधा और बहुशाखीय होता है, इसके फूल गोल, चक्राकर सफेद गुच्छों में होते हैं, जो अगस्त सितम्बर के महीने में खिलते है। फल अक्टूबर में लगते हैं। इसके पौधे सारे भारत में पाये जाते हैं। इसका पंचांग ही औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

सिरदर्द: सिर दर्द चाहे कैसा भी हो? पूरे सिर का या आधे सिर का-ऐसे व्यक्ति को नाक में पंचांग के रस की एक-एक बून्द डालने से तीन दिन में ही सिर दर्द गायब हो जाता है।

तेज बुखार: जिस व्यक्ति को तेज बुखार हो ऐसे रोगी को द्रोणपुष्पी का 2 चम्मच रस शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराने से बुखार की तेजी कम हो जाती है। 10 दिन के लगातार प्रयोग से बुखार दूर हो जाता है।

पीलिया रोग:  पीलिया का रोग होने पर इसके पंचांग का रस सुबह-शाम सेवन कराने से रोगी का रोग 20 दिन में खत्म हो जाता है।

पीलिया के रोगी को गरम चीजों का सेवन न करायें। गरम एवं तली हुई चीजें हानिकारक होती है।

पेट दर्द: पेट दर्द होने पर इसके पंचांग का स्वरस काला नमक डालकर प्रयोग करने से रोगी को तुरंत आराम मिलता है। इसके सेवन से ही पेट दर्द बन्द हो जाता है।

Read More.


Go Back