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कचनार से रोगों का उपचार

कचनार का वृक्ष प्राकृतिक रुप से जमीन के अन्दर से अपने आप निकलता है। इसके दो पत्ते आपस में जुडे रहते हैं। इसके रंग बिरंगे फूल फरवरी मार्च में खिलते हैं, जो मई-जून में फलों का रुपधारण कर लेते हैं। इसकी छाल और फूल ही औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

चर्म रोग में लाभदायक: चर्म रोग होने पर इसकी जड का चूर्ण बनाक्र उसे पानी के साथ उन जगहों पर लेप करने से सात दिन में ही चर्म रोग दूर हो जाते है।

कृमि, कुष्ठ, गुदाभ्रंश, एवं ब्रणरोग: उपरोक्त सभी रोग में कचनार की छाल का काढा बनाकर सुबह-शाम सेवन कराने से 20 दिन में ही उपरोक्त सभी रोग से मुक्ति मिल जाती है।

गंडमाला : गंडमाला निकल आने पर रोगी को इसकी जड तथा छाल को 5 ग्राम चूर्ण 3 ग्राम सोंठ के चूर्ण, के साथ मिलाक्र सुबह-शाम ताजे पानी के साथ 20 दिन तक सेवन कराने से गंडमाला का रोग ठीक हो जाता है।

रक्त-पित्त: रक्त पित्त का रोग हो जाने पर इसके फूलों का 2 चम्मच रस एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर रोगी को सुबह-शाम सेवन कराने से एक हफ्ते में रक्त पित्त दूर हो जाता है।

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