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डायरिया से रहें बच कर और करें जल्द उपाय

बार बार दस्त लगे तो इस डायरिया कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार यदि दिन में पांच या इससे अधिक बार मॉल त्याग के लिए जाना अपडे तो इसे चिंताजनक स्थिति माना जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यदि दिन में तीन से अधिक बार ज्यादा मात्रा में ढीला मॉल त्याग हो रहा है तो इसे डायरिया का लक्षण माना जाना चाहिए। डायरिया दो तरह का होता है। एक्यूट और क्रॉनिक। एक्यूट डायरिया जीवाणु, विषाणु या पैरासाइट के कारन होता है। यह सामान्यतः हफ्ते भर में ठीक हो जाता है, लेकिन जब बीमारी हफ्ते भर से ज्यादा रह जाए तो उसे क्रॉनिक कहा जाता है। क्रॉनिक डायरिया आंत की विभिन्न बीमारियों के कारण हो सकता है। इसमें पाचन तंत्र की गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है।

Avoid Living Diarrhea

Try these solutions and fix diarrhea)

क्या है कारण 

  • सबसे बड़ा कारण है खाने पीने की चीजों में प्रदूषण, उनका बासी या खराब होना।
  • प्रदूषित पानी पीने से डायरिया की स्थिति पैदा हो सकती है। 
  • वायरल संक्रमण।
  • आँतों में बैक्टीरिया का संक्रमण।
  • पाचनशक्ति कमजोर होना।
  • शरीर में पानी की कमी होना।
  • किसी ख़ास बीमारी के कारण आँतों में कमजोरी आ जाए तो भी डायरिया हो सकता है।

वायरस है जिम्मेदार 

चिकत्सा विज्ञान के अनुसार तीन तरह के वायरस खासतौर से डायरिया का सांखरामान फैलाते हैं। नोरो -वायरस और रोटा-वायरस पांच साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा संक्रमित करते हैं। वयस्कों को भी ये अपना शिकार बना सकते हैं, पर एडेनो वायरस किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए डायरिया का कारण बन सकता है।

क्या क्या है लक्षण 

डायरिया  का शुरूआती लक्षण है बार बार दस्त लगना। दस्त पतला होता है, उसमें पानी का अंश ज्यादा होता हैव् दिन भर में चार पांच या इससे भी ज्यादा बार दस्त हो सकते हैं| बीमारी बढ़ने लगे तो आँतों में मरोड़ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द भी होने लगता है। डायरिया जल्दी काबू में न आए तो डीहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो सकती है और मरीज कमजोरी महसूस कर सकता है। ऐसी स्थिति में बुखार आना सामान्य बात है। शरीर में पानी के साथ खनिज तत्वों की ज्यादा कमी होने लगे तो मरीज बेहोशी की हालत में जा सकता है और स्थिति जानलेवा बन सकती है।

कौन आता इसकी चपेट में

पांच साल तक के बच्चे डायरिया की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती है। साफ़ सफाई में ज़रा सी असावधानी उनके लिए डायरिया का कारण बन जाती है। गंदे हाथों से छूने, डायपर बदलते समय सफाई पर ठीक से ध्यान न देने अथवा बच्चों द्वारा गंदी चीजों को छोकर आंख, मुंह नाक आदि छूने मलने से संग्रामं की स्थिति पैदा हो सकती है। पूरी दुनिया में डायरिया के कुल मामलों में से नब्बे फीसदी विकासशील और अविकसित देशों में होते हैं। बच्चों के बाद, डायरिया की चपेट में आने वालों में बुजुर्गों की संख्या सबसे ज्यादा है।

बरसात में रहें सवधान 

गर्मी के आलावा बरसात के मौसम में डायरिया की आशंका सबसे ज्यादा होती है। बारिश की वजह से नदी-नाले, ताल-तलैया सब उफान पर होतें हैं। जगह जगह जमी गन्दगी तैरने लगती है। अतिरिक्त सावधानी न रहे तो पीने का पानी भी आसानी से प्रदूषित हो जाता है। इससे डायरिया के विषाणु किसी को भी बड़ी आसानी से संक्रमित कर सकते है। पानी में भीगने और मिट्टी में खेलने की बच्चों की आदत होती है। इस कारण वे ज्यादा आसानी से इसके शिकार बनाते है|  बरसात के मौसम में खाने पीने की चोजों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करना चाहिए।

पानी की कमी न होने दें

डायिरया हो जाए तो इस बात का सबसे पहले ध्यान रखें की शरीर में पानी की कमी न हो पाए। समय समय पर ओआरएस घोल पीते रहें। नींबू पान पिएँ। एक गिलास पानी में एक चुटकी नमक और थोड़ी सी शक्कर मिलाकर बार बार पिएँ। इससे शरीर डीहाइड्रेशन का शिकार नहीं होगा। साफ़ सुथरे फलों का रस पिएँ। बाजार में बिकने वाला जूस भूलकर भी न पिएँ। तरल पदार्थों का सेवन करें, लेकिन दूध और दूध से बनी चीजों से परहेज करें।

हाथ अच्छी से धोएं 

महज ठीक तरह से हाथ धोकर भी डायरिया से काफी हद तक बचे रहा जा सकता है । बच्चों के लिए हाथ धोने का तरीका खासतौर से महत्वपूर्ण है। असल में बच्चे हाथ धोने पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। बाथरूम से आने के बाद, खेलने कूदने के बाद या खाने से पहले अगर बड़े ध्यान न दें तो बच्चे अकसर लापरवाही कर जाते हैं और डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। जाहिर है की बच्चों में हाथ धोने की आदत डालने की जरुरत होती है। हाथ धोने की पानी में ज़रा भी शंका हो तो गुनगुने पानी से हाथ धोएं। एंटी बैक्टीरियल साबुन इस्तेमाल करें। साबुन में झाग उठाकर कम से कम 20 से 30 सेकेण्ड तक बच्चे का हाथ धोएं। हाथ धोने के बाद साफ़ और सूखे तौलिये से हाथ पोंछना भी ना भूलें।

कब जाएं डॉक्टर के पास 

सामान्य घरेलू उपायों से डायरिया काबू में न आए तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए। बहुत छोटे बच्चों को डायरिया हो जाए तो भी घरेलू उपचारों का ज्यादा खतरा नहीं उठाना चाहिए। बच्चों के मामले में जयदा लापरवाही इसलिए भी ठीक नहीं है की ज्यादा समय तक डायरिया रह जाए तो यह शरीर और मस्तिष्क के विकास पर बुरा असर डाल सकता है। एक बार ठीक होने के बाद डायरिया के लक्षण दोबारा दिखने लगें तो डॉक्टर को दिखाना बेहतर है। कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई दे तो भी डॉक्टर के पास जाना ही बेहतर है। आसपास कोई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र हो तो डायरिया के इलाज के लिए यह निरापद उपाय हो सकता है।

होमियोपैथी है कारगर 

डायरिया में होमियोपेथी बिना किसी साइड इफेक्ट के बेहद कारगर साबित हो सकती है। दस्त की बीमारी में आमतौर पर लसखान काफी स्पष्ट होतें हैं, इसलिए होमियोपैथी डॉक्टर के लिए इसका इलाज भी ज्यादा मुश्किल भरा नहीं रहता। अच्छी बात है की लक्षण ठीक से मिल जाने पर डायरिया के अनुषंगी लक्षण बुखार, कमजोरी, थकावट आदि सभी परेशानियां आसानी से ठीक हो जाती है। बिना डॉकटर की सलाह के दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

बड़े काम का सेब है 

कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलागरी के स्टीफन बी. फ्रीडमैन की अगुआई में हुए एक शोध के अनुसार डायरिया होने पर किसी इलेक्ट्रोलाइट पेय पदार्थ की तुलना में सेब का पतला जूस सबसे बेहतर इलाज हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है की सेब के पतले जूस से शरीर में पानी की कमी का इलाज किया गया तो यह 83 प्रतिशत बच्चों में कारगर रहा।

आजमाएं ये उपाय और ठीक करें डायरिया (Try these solutions and fix diarrhea)

  • डायरिया होते ही मिर्च मसाले की चीजें खाना तुरंत बंद कर दें। 
  • पानी और तरल पदार्थ भरपूर मात्रा में लें।
  • केला और सेब का मुरब्बा खाएं।
  • छाछ या दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने से पेट की एक दो बार में ही अच्छी सफाई हो जाती है और मॉल बधकर आने लगता है।
  • अदरक का रस, नींबू और काली मिर्च का ज़रा सा चूर्ण पानी में मिलाकर पीने से राहत मिलती है। 
  • भूख लगाने पर मूंग की खिचड़ी और साबूदाना खाएं। भोजन बंद न करें, पर पचने में हल्का भोजन लें।
  • फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह धो लें।
  • रेहड़ी खोमचे पर कुछ खाएं तो पहले निश्चित कर लें कि वहां साफ़ सफाई है या नहीं।
  • डायरिया कि स्थिति में हो सके तो पानी को उबाल कर ठंडा करके पिएँ।
  • बैज्ञानिक शोधों के अनुसार पीने के पानी को तांबे के बरतन में रखना बेहतर उपाय है। ताम्बे के बरतन में पानी रखने से 40 -45 मिनट के भीतर तमाम तरह के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।
  • भूरे चावल को उबाल कर छाने और जो माड़ निकले, उसे ठंडा करके डायरिया के मरीज को दें।

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